कितना प्यारा होता है ये बचपन ..
कोई हो जाये नाराज़ ..या कह दे हमको ख़राब ,
परवाह नहीं किसी की ..हम तो बाटेंगे सबको प्यार ..
बैठकर पापा के कंधो पे ..और लेटकर माँ की गोदी में,
अपना सुख ढूंढ लेते हम ..उनकी प्यार वाली थपथपाहट में ..
ना ज़रूरत किसी की हमको ..हम तो मस्त मौला बिंदास है ..
सीधे सादे हम छोटे बच्चे ..दिल के कितने सच्चे और मासूम है..
हस्ते है ,कभी रोते है ..और कभी दिखाते है अपना लड़कपन ,
फिर भी हम है सबसे अच्छे ..क्यूंकि यही तो है कहलाता बचपन..
तुम भी क्यूँ न बन जाते छोटे ..और जी लेते खुलके हरपल..
कहोगे दोबारा फिर..सच..कितना प्यारा होता है ये बचपन ...........
gunjan :)
